21 दिवसीय रामायण पाठ एवं प्रतियोगिता को लेकर 27 जुलाई को होगी महत्वपूर्ण बैठक
चौरई : मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के चौरई नगर की पहचान केवल उसके भौगोलिक क्षेत्र से नहीं, बल्कि यहां की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं से भी जुड़ी हुई है।
इन्हीं गौरवशाली परंपराओं में तुलसी जयंती समारोह का विशेष स्थान है, जो इस वर्ष अपने 60वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। छह दशकों से निरंतर आयोजित हो रहा यह पारंपरिक आयोजन चौरई की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक बन चुका है।
तुलसी जयंती समारोह समिति द्वारा पिछले 60 वर्षों से आयोजित किए जा रहे इस आयोजन ने न केवल रामायण और भारतीय संस्कृति की परंपराओं को जीवंत रखा है,
बल्कि चौरई को मध्यप्रदेश में एक विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस आयोजन की निरंतरता के पीछे चौरई के नागरिकों, धर्मप्रेमी बंधुओं, रामायण पाठ मंडलों, समिति के पदाधिकारियों, सहयोगकर्ताओं और दानदाताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
इसी गौरवशाली परंपरा के अंतर्गत आयोजित होने वाले 21 दिवसीय रामायण पाठ एवं प्रतियोगिता की तैयारियों को लेकर 27 जुलाई 2026, सोमवार को रात्रि 8:30 बजे माता मंदिर परिसर, चौरई में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी।
बैठक में आयोजन के सफल संचालन, विभिन्न व्यवस्थाओं एवं आगामी कार्यक्रमों को लेकर चर्चा की जाएगी।
यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि चौरई की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का उत्सव है। ऐसे आयोजन हमारी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, संस्कारों और भारतीय संस्कृति से जोड़ने का कार्य करते हैं।

भगवान श्रीराम के आदर्शों और गोस्वामी तुलसीदास जी की रामायण परंपरा से जुड़े इस आयोजन के माध्यम से भारतीय संस्कृति की महानता, सनातन परंपराओं की समृद्धि और भारत की गौरवशाली विरासत का संदेश जन-जन तक पहुंचता है।
60 वर्षों की यह यात्रा अपने आप में चौरई के लिए गौरव का विषय है। बदलते समय के साथ जहां अनेक पारंपरिक आयोजन धीरे-धीरे विलुप्त हो रहे हैं,
वहीं चौरई में छह दशकों से इस सांस्कृतिक परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाना यहां के नागरिकों की आस्था और संस्कृति के प्रति समर्पण को दर्शाता है।









