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जन्मदिन बना जनजागरण का माध्यम, डॉ. दुर्गेश वर्मा ने वृक्षारोपण और सुंदरकांड पाठ से दिया भारतीय संस्कृति का संदेश

धार्मिक आस्था, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सरोकारों के साथ मनाया जन्मोत्सव, युवाओं से संस्कारों को अपनाने की अपील

चौरई (CTV): बदलते दौर में जहां जन्मदिन का उत्सव आधुनिकता और दिखावे की संस्कृति तक सीमित होता जा रहा है, वहीं चौरई नगर के प्रसिद्ध होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. दुर्गेश वर्मा (डॉ. गुरिया) ने अपने जन्मदिन को समाज और प्रकृति के प्रति दायित्व निभाने का अवसर बनाकर एक नई सोच प्रस्तुत की। धार्मिक आस्था, पर्यावरण संरक्षण और भारतीय संस्कृति के मूल्यों को केंद्र में रखकर मनाया गया उनका जन्मोत्सव नगरवासियों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।

प्रातःकाल डॉ. वर्मा ने जोड़ा हनुमान मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और अपने जीवन को समाज सेवा के लिए समर्पित रखने का संकल्प लिया। इसके पश्चात शासकीय महाविद्यालय चौरई परिसर में जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों एवं युवा साथियों के साथ औषधीय एवं छायादार पौधों का वृक्षारोपण किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जन्मदिन पर यदि एक पौधा लगाया जाए तो यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का भी उत्सव बन जाएगा।

दिनभर नगर के विभिन्न स्थानों पर शुभचिंतकों ने उनका आत्मीय स्वागत कर जन्मदिवस की शुभकामनाएं दीं। वहीं सायंकाल बस स्टैंड स्थित मां नर्मदा होम्योपैथिक क्लिनिक परिसर में संगीतमय सुंदरकांड पाठ का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया।

इस अवसर पर डॉ. दुर्गेश वर्मा ने कहा कि जन्मदिन केवल केक काटने या औपचारिक पार्टियों तक सीमित नहीं होना चाहिए। भारतीय संस्कृति हमें सिखाती है कि प्रत्येक शुभ अवसर पर ईश्वर का स्मरण, प्रकृति का संरक्षण, समाज सेवा और वरिष्ठजनों का आशीर्वाद प्राप्त करना ही जीवन को सार्थक बनाता है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे जन्मदिन को सेवा, संस्कार और पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर समाज के लिए प्रेरणा बनने का प्रयास करें।

CTV के लिए कैमरा पर्सन अजय सोनी के साथ श्याम चौरसिया की रिपोर्ट