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भक्ति की धुन पर थिरकेंगे कदम, रंगतारी गरबा नाइट के लिए सज रहा चौरई

त्रिनेत्र ग्रुप के आयोजन को लेकर उत्साह, सरोज वाटिका में 16 एवं 17 अक्टूबर को सजेगी गरबा की रंगीन शाम; वर्कशॉप में पारंपरिक गरबा और डांडिया की बारीकियां सीख रहे प्रतिभागी

चौरई : जब मां की आराधना में उठते हाथ, गरबा की लय पर थिरकते कदम और आस्था से भरे मन एक साथ जुड़ते हैं, तो उत्सव केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि भक्ति और संस्कृति का उत्सव बन जाता है। कुछ ऐसा ही माहौल इन दिनों चौरई में देखने को मिल रहा है, जहां त्रिनेत्र ग्रुप द्वारा आयोजित होने जा रही रंगतारी गरबा नाइट को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं।

चौरई की सरोज वाटिका में 16 एवं 17 अक्टूबर को आयोजित होने वाले इस गरबा उत्सव से पहले प्रतिभागियों के लिए विशेष वर्कशॉप आयोजित की जा रही है। इसमें पांच वर्ष की नन्ही बच्चियों से लेकर युवतियां और महिलाएं उत्साहपूर्वक हिस्सा ले रही हैं। प्रशिक्षकों द्वारा प्रतिभागियों को पारंपरिक गरबा और डांडिया की विभिन्न स्टेप सिखाई जा रही हैं, ताकि आयोजन के दौरान वे पूरे उत्साह और आत्मविश्वास के साथ अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें।

आरती से होती है शुरुआत, भक्ति की धुन पर सीख रहे गरबा

वर्कशॉप की खास बात यह है कि इसकी शुरुआत आरती के साथ की जाती है। इसके बाद गरबा की मधुर धुनों पर प्रतिभागी एक से बढ़कर एक स्टेप का अभ्यास करते हैं। प्रशिक्षण के दौरान जहां पारंपरिक गरबा की लय और ताल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, वहीं प्रतिभागियों में कुछ नया सीखने और अपनी कला को निखारने का उत्साह भी दिखाई दे रहा है।

गरबा भारतीय संस्कृति में आस्था, सामूहिकता और उल्लास का प्रतीक है। नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की आराधना से जुड़ा यह लोकनृत्य लोगों को अपनी परंपराओं से जोड़ने के साथ ही समाज में एकता और सहभागिता का संदेश भी देता है। ऐसे आयोजनों में नई पीढ़ी की भागीदारी भारतीय सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने की एक सुंदर पहल मानी जा सकती है।

नन्हे कदमों से लेकर महिलाओं तक, हर उम्र में उत्साह

रंगतारी गरबा नाइट की तैयारी में शामिल प्रतिभागियों का उत्साह वर्कशॉप में साफ दिखाई दे रहा है। पांच साल की बच्चियों से लेकर युवतियां और महिलाएं गरबा एवं डांडिया की स्टेप सीखने में जुटी हैं। अभ्यास के दौरान कहीं नन्हे कदम गरबा की लय पकड़ रहे हैं, तो कहीं अनुभवी प्रतिभागी अपनी प्रस्तुति को और बेहतर बनाने में लगे हैं।

आयोजकों के अनुसार, 15 अक्टूबर को रिहर्सल आयोजित की जाएगी। इसके बाद 16 एवं 17 अक्टूबर को सरोज वाटिका में रंगतारी गरबा नाइट का आयोजन होगा।

संस्कृति को जीवंत रखने की पहल

आज के दौर में ऐसे सांस्कृतिक आयोजन स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और लोकसंस्कृति से परिचित कराने का अवसर भी प्रदान करते हैं। त्रिनेत्र ग्रुप की इस पहल के माध्यम से चौरई में भक्ति, संगीत, नृत्य और सामूहिक उत्सव की एक सुंदर तस्वीर उभर रही है।

रंगतारी गरबा नाइट की तैयारियां केवल एक आयोजन की तैयारी नहीं, बल्कि आस्था से जुड़ने, संस्कृति को जीने और मिलकर उत्सव मनाने का अवसर हैं। अब सभी की निगाहें 16 और 17 अक्टूबर को होने वाले इस आयोजन पर टिकी हैं, जहां गरबा की थाप और डांडिया की खनक के बीच भक्ति एवं सांस्कृतिक उल्लास का संगम देखने को मिलेगा।