
किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष बनने के बाद पत्रकारों से बोले — “पद नहीं, काम की पहचान जरूरी”
चौरई (CTV) : राजनीति में पद और दायित्व अक्सर उपलब्धि माने जाते हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो जिम्मेदारी को सम्मान नहीं बल्कि सेवा का माध्यम मानते हैं। ऐसा ही भाव किसान मोर्चा के नव नियुक्त जिला अध्यक्ष शैलेंद्र रघुवंशी की बातों में उस समय देखने मिला जब उन्होंने नगर के सेवा सदन कार्यालय में पत्रकारों के साथ अनौपचारिक चर्चा की।

सादगी और स्पष्टता से भरी बातचीत में शैलेंद्र रघुवंशी ने कहा कि “दायित्व मिलना कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है, मेरी पहली प्राथमिकता कार्य करना है। यदि जनता और किसान के बीच रहकर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं कर पाए तो पद का कोई महत्व नहीं रह जाता।”
उन्होंने वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि मजबूत नेतृत्व और जमीनी कार्यों की कमी के कारण आम लोगों और किसानों को अपने छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी भटकना पड़ता है। उनका मानना है कि संगठन को मजबूत करने के लिए केवल भाषण नहीं बल्कि ईमानदारी और निरंतर कार्य आवश्यक है।
किसानों की समस्याओं पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में ई-टोकन व्यवस्था, खाद वितरण और समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी जैसे मुद्दे किसानों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। उनकी प्राथमिकता रहेगी कि किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद आसानी से उपलब्ध हो तथा उनकी उपज का उचित संग्रहण और खरीदी सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने भविष्य की योजनाओं को साझा करते हुए कहा कि अब समय आ गया है जब किसानों को जैविक खेती की ओर प्रेरित किया जाए। जिस प्रकार छिंदवाड़ा में जैविक हाट बाजार किसानों के लिए नई पहचान बन रहा है, उसी प्रकार चौरई विधानसभा क्षेत्र में भी जैविक खेती को बढ़ावा देने और किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष जैविक हाट बाजार स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा।
शैलेंद्र रघुवंशी ने पत्रकारों से भी क्षेत्र के विकास में सहयोग की अपील करते हुए कहा कि मीडिया समाज और प्रशासन के बीच मजबूत कड़ी है। यदि सभी का सहयोग मिला तो क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन लाना संभव होगा।
इस अवसर पर नगर के प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित रहे। चर्चा के दौरान किसानों, संगठन और क्षेत्रीय विकास को लेकर गंभीर एवं सकारात्मक वातावरण देखने मिला।
कैमरा मैन शुभांशु के साथश्याम चौरसिया की रिपोर्ट







