Home अपना शहर छिंदवाड़ा की 136 साल पुरानी समिति करेगी अयोध्या में रामलीला का मंचन,...

छिंदवाड़ा की 136 साल पुरानी समिति करेगी अयोध्या में रामलीला का मंचन, राजा जनक की भूमिका निभाएंगे भाजपा के ये सांसद

सन 1889 से हर साल दशहरा के मौके पर रामलीला का मंचन करने वाले ग्रुप ने अब अयोध्या मे रामलीला करने का निर्णय लिया है। छिंदवाड़ा की 136 साल पुरानी श्री रामलीला मंडल समिति को अयोध्या में मंचन का आमंत्रण मिला है। इस मंचन में छिंदवाड़ा सीट से भाजपा सांसद बंटी विवेक साहू मिथिला नरेश जनक की भूमिका में दिखाई देंगे।

सन 1889 से लगातार हर वर्ष दशहरा पर्व पर रामलीला का मंचन करने वाली छिंदवाड़ा की ऐतिहासिक श्री रामलीला मंडल समिति अब एक नए अध्याय की शुरुआत करने जा रही है। समिति को अयोध्या में रामलीला प्रस्तुति का विशेष आमंत्रण प्राप्त हुआ है, जिसे वह अपने लिए गौरव का विषय मान रही है।

भाजपा सांसद निभाएंगे राजा जनक की भूमिका

अयोध्या में यह भव्य मंचन 13 से 15 दिसंबर तक आयोजित किया जाएगा। इस प्रस्तुति का एक विशेष आकर्षण यह होगा कि छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से भाजपा सांसद बंटी विवेक साहू इस बार मिथिला नरेश जनक की भूमिका में मंच पर नजर आएंगे।

अयोध्या की पवित्र भूमि पर रामलीला का मंचन का लिया था संकल्प

समिति के अध्यक्ष अरविंद राजपूत बताते हैं कि मंडल ने वर्षों पहले संकल्प लिया था कि एक दिन अयोध्या की पवित्र भूमि पर रामलीला का मंचन अवश्य किया जाएगा। अब वह संकल्प साकार होने जा रहा है। छिंदवाड़ा से रवाना होने वाली रामलीला मंडली अयोध्या में पहुंचकर पहले एक भव्य शोभायात्रा निकालेगी, जिसके बाद तीन दिवसीय मंचन का शुभारंभ किया जाएगा।

यह परंपरा उनके पूर्वजों ने वर्ष 1889 में शुरू की थी

समिति के संरक्षक सतीश दुबे के अनुसार, रामलीला की यह परंपरा उनके पूर्वजों ने वर्ष 1889 में शुरू की थी। उस समय न बिजली का साधन था और न आधुनिक उपकरण। लालटेन की मद्धिम रोशनी, मिट्टी से बने प्राकृतिक रंग और घरों में तैयार की जाने वाली पोशाकें ही मंचन का आधार होती थीं।

धीरे-धीरे समय बदला और तकनीक विकसित हुई। आज रामलीला मंडल थ्री-डी तकनीक का उपयोग कर कई जटिल और भव्य दृश्यों को बड़े पर्दे पर सजीव करता है।

यह भी पढ़ें- विशेष तकनीक से बना है अयोध्या राम मंदिर का धर्मध्वज, धूप-बारिश में भी वर्षों तक रहेगा सुरक्षित

अयोध्या में होने वाला यह ऐतिहासिक मंचन न केवल मंडल की वर्षों पुरानी परंपरा का सम्मान है, बल्कि रामभक्ति की उस अनवरत धारा का भी प्रतीक है, जो पीढ़ियों से निरंतर बहती आ रही है।