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रामलीला के मंच से गूंजा संदेश—अहंकार का अंत निश्चित, मर्यादा का मार्ग श्रेष्ठ

रामलीला ने दिया मर्यादा, आदर्श और सदाचार का संदेश, सीतापार में मंचीय रामलीला का भव्य समापन

चौरई : क्षेत्र के ग्राम सीतापार स्थित बालरूपी हनुमान मंदिर परिसर में विगत दिनों से चल रही मंचीय रामलीला का श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ समापन हुआ। विंध्याचल (बनारस) से आए अनुभवी कलाकारों द्वारा भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान एवं अन्य पात्रों के जीवन प्रसंगों का सजीव मंचन किया गया, जिसे देखने प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

रामलीला के माध्यम से कलाकारों ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र, माता सीता की त्यागमयी निष्ठा तथा लक्ष्मण की सेवा, समर्पण और कर्तव्यपरायणता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। नाट्य मंचन ने दर्शकों को यह संदेश दिया कि जीवन में कितनी भी कठिन और विपरीत परिस्थितियां क्यों न आएं, यदि व्यक्ति धैर्य, संयम, सत्य और सदाचार का मार्ग नहीं छोड़ता तो वह अंततः सफलता और सम्मान प्राप्त करता है।

रामायण के प्रसंगों के साथ-साथ रावण के चरित्र के माध्यम से भी महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश दिया गया। मंचन में दर्शाया गया कि ज्ञान, शक्ति और वैभव होने के बावजूद अहंकार, अन्याय और गलत मार्ग का अनुसरण व्यक्ति के पतन का कारण बनता है। रावण का अंत इस बात का प्रतीक है कि एक बुराई न केवल व्यक्ति बल्कि पूरे परिवार, समाज और राज्य को भी प्रभावित कर सकती है।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित ग्रामीणों ने कलाकारों की भावपूर्ण प्रस्तुति की सराहना की। कलाकारों ने अपनी जीवंत अभिनय शैली से अयोध्या की संस्कृति, रामराज्य की कल्पना और भारतीय जीवन मूल्यों को मंच पर साकार कर दिया। उनके उत्कृष्ट अभिनय ने युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया।

रामलीला आयोजन को सफल बनाने में हनुमान मंदिर समिति एवं ग्राम के युवाओं की भूमिका भी सराहनीय रही। युवाओं ने व्यवस्था, सुरक्षा, स्वच्छता एवं दर्शकों की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखते हुए आयोजन को अनुशासित एवं भव्य स्वरूप प्रदान किया। ग्रामीणों ने समिति एवं युवाओं के इस प्रयास की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक जागरूकता और नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का कार्य करते हैं।

रामलीला के समापन अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने तथा समाज में प्रेम, सद्भाव और नैतिकता को बढ़ावा देने का संकल्प लिया