Home Uncategorized पढ़ने और समझने की आदत से आसान होगी पढ़ाई : न्यायाधीश खंडायत

पढ़ने और समझने की आदत से आसान होगी पढ़ाई : न्यायाधीश खंडायत

आदिवासी कन्या छात्रावास पहुंचकर छात्राओं से की व्यवहारिक चर्चा, बारिश में स्कूल जाने के लिए वितरित की छतरी

चौरई (CTV) : पढ़ाई केवल किताबों के पन्ने याद करने का नाम नहीं है, बल्कि विषय को समझने और उसे जीवन से जोड़कर सीखने का माध्यम है। यदि पढ़ने और समझने की आदत विकसित हो जाए तो पढ़ाई भी आसान लगने लगती है। आज के समय में विद्यार्थियों के लिए किताबी ज्ञान के साथ अपनी भाषा, शब्द भंडार और सामान्य ज्ञान को समृद्ध करना भी उतना ही आवश्यक है। यह बात न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्री धर्मेंद्र खंडायत ने चौरई स्थित आदिवासी कन्या छात्रावास में छात्राओं से संवाद के दौरान कही।

न्यायाधीश श्री खंडायत ने छात्राओं से सहज एवं व्यवहारिक चर्चा करते हुए कहा कि आज पढ़ाई केवल रटने की बात नहीं, बल्कि समझने की बात है। जब हम किसी विषय को समझकर पढ़ते हैं तो उसका ज्ञान लंबे समय तक हमारे साथ रहता है। उन्होंने छात्राओं को नियमित रूप से समाचार पत्र पढ़ने की आदत विकसित करने की सलाह देते हुए कहा कि इससे भाषा और शब्दों का ज्ञान बढ़ता है। वहीं देश-दुनिया में क्या हो रहा है, इसकी जानकारी के लिए टेलीविजन पर अच्छे समाचार चैनल देखने की आदत भी विद्यार्थियों के सामान्य ज्ञान को मजबूत करती है।

उन्होंने छात्राओं को उनके अभिभावकों द्वारा किए जा रहे प्रयासों और त्याग का महत्व समझाते हुए कहा कि माता-पिता अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए अनेक कठिनाइयों का सामना करते हैं। वे अपनी सुविधाओं और सुखों को पीछे रखकर बच्चों की शिक्षा और भविष्य के निर्माण के लिए मेहनत करते हैं। ऐसे में छात्राओं की जिम्मेदारी है कि वे पूरी लगन और मेहनत से पढ़ाई करें, अपने जीवन में सफलता हासिल करें और अपने अभिभावकों के सपनों को साकार करें।

बारिश में भीगते बच्चों को देखकर किया सहयोग

इस दौरान न्यायाधीश श्री खंडायत ने छात्रावास एवं विद्यालय आने-जाने वाली छात्राओं की एक व्यावहारिक समस्या को भी महसूस किया। न्यायालय के सामने से बारिश के दौरान छात्राओं को भीगते हुए जाते देखकर उन्होंने उनकी आवश्यकता को समझते हुए छात्राओं के लिए छतरियों की व्यवस्था कर उनका वितरण किया, ताकि बारिश के मौसम में वे सहजता से छात्रावास से स्कूल और स्कूल से छात्रावास आ-जा सकें।

यह पहल भले ही छोटी दिखाई दे, लेकिन विद्यार्थियों की जरूरत को समझकर समय पर किया गया सहयोग समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश देता है। बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए केवल शिक्षा देना ही नहीं, बल्कि उनकी छोटी-बड़ी आवश्यकताओं को समझना और उनके साथ खड़े होना भी समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

न्यायाधीश श्री खंडायत का छात्राओं के बीच पहुंचकर उनसे संवाद करना और उनकी आवश्यकता के अनुरूप सहयोग प्रदान करना यह संदेश देता है कि समाज के प्रत्येक वर्ग के बच्चों की शिक्षा और बेहतर भविष्य के लिए संवेदनशीलता के साथ प्रयास किए जा सकते हैं। ऐसे प्रयास निश्चित रूप से अन्य लोगों को भी प्रेरणा देते हैं कि वे अपनी क्षमता के अनुसार बच्चों की शिक्षा, सुविधा और भविष्य निर्माण में योगदान के लिए आगे आएं।

इस अवसर पर न्यायाधीश श्री धर्मेंद्र खंडायत के साथ स्टाफ, पत्रकार अजय सेन श्याम चौरसिया, आदिवासी कन्या छात्रावास की अधीक्षक वर्षा शर्मा एवं छात्रावास का स्टाफ उपस्थित रहा।

CTV के लिए श्याम चौरसिया की रिपोर्ट