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चार पीढ़ियों से निभा रहे परंपरा, भावेश खंडेलवाल की पहल बनी आस्था की मिसाल

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हरछठ पर्व पर गुली का तेल निशुल्क वितरित, सुबह से चक्की पर उमड़ती है नागरिकों की भीड़

चौरई (CTV ) : बदलते समय के बीच जब कई पारंपरिक रीति-रिवाज धीरे-धीरे पीछे छूटते जा रहे हैं, ऐसे दौर में चौरई में एक परिवार चार पीढ़ियों से आस्था और परंपरा की लौ को निरंतर प्रज्ज्वलित किए हुए है। हरछठ पर्व पर दीपक जलाने के लिए उपयोग होने वाले गुली के तेल का निशुल्क वितरण खंडेलवाल चक्की द्वारा वर्षों से किया जा रहा है।

हरछठ पर्व के अवसर पर इस तेल की विशेष आवश्यकता होती है, लेकिन सामान्य तौर पर इसका मिलना आसान नहीं होता। ऐसे में खंडेलवाल चक्की पर सुबह से ही बच्चे, महिलाएं और नागरिक अपनी जरूरत के अनुसार गुली का तेल लेने पहुंचते हैं। यहां से प्राप्त तेल का उपयोग श्रद्धालु हरछठ की पूजा के दौरान दीपक जलाने में करते हैं।

नगर के वरिष्ठ नागरिक जगदीश प्रसाद चौरसिया के अनुसार हमारे देखते हुए यह परंपरा स्वर्गीय जगन्नाथ प्रसाद खंडेलवाल से शुरू हुई, जिसे स्वर्गीय ओमप्रकाश प्रसाद खंडेलवाल, फिर श्री कल्लू उर्फ भावेश खंडेलवाल और अब पवन खंडेलवाल आगे बढ़ा रहे हैं। चार पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा केवल तेल वितरण तक सीमित नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति और आस्था से जोड़ने का एक सुंदर प्रयास भी है।

हरछठ के दिन चक्की पर लगने वाली नागरिकों की कतार इस बात की गवाही देती है कि आधुनिकता के बीच भी लोक परंपराओं और आस्था का महत्व कायम है। निशुल्क तेल वितरण की यह पहल जरूरतमंदों के लिए सुविधा तो है ही, साथ ही वर्षों पुरानी परंपरा को जीवित रखने का प्रेरणादायी माध्यम भी बन गई है।

ऐसी परंपराएं समाज की सांस्कृतिक विरासत होती हैं। इन्हें आगे बढ़ाना केवल किसी एक परिवार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नई पीढ़ी तक अपनी जड़ों और संस्कारों को पहुंचाने का माध्यम है।

CTV के लिए कैमरा पर्सन शुभांशु सिरोहिया के साथ श्याम चौरसिया की रिपोर्ट