
निरीक्षण की सूचना मिलते ही कई दुकानों के शटर गिरे, व्यापारियों के दुकान बंद कर चले जाने पर उठे सवाल
चौरई (CTV) : नगर में बीते दो दिनों से खाद-बीज दुकानों के निरीक्षण को लेकर कृषि विभाग की गतिविधियां तेज हो गई हैं। संभागीय टीम के साथ स्थानीय कृषि विभाग की टीम द्वारा विभिन्न दुकानों का निरीक्षण कर खाद-बीज का स्टॉक, वैध लाइसेंस, दुकान में उपलब्ध उत्पादों एवं संबंधित दस्तावेजों की जानकारी ली जा रही है। इसके साथ ही वर्तमान में शासन द्वारा प्रतिबंधित किए गए प्रोडक्ट की उपलब्धता की भी जांच की जा रही है।
संभागीय टीम के निरीक्षण की जानकारी सामने आते ही नगर की कुछ खाद-बीज दुकानों के शटर बंद मिलने और दुकानदारों के मौके से चले जाने की चर्चा भी तेज हो गई है। बुधवार को भी टीम द्वारा निरीक्षण किया गया, लेकिन इस दौरान कई दुकानें बंद मिलीं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि दुकानदारों के पास सभी आवश्यक दस्तावेज, लाइसेंस और स्टॉक का रिकॉर्ड नियमानुसार उपलब्ध है, तो निरीक्षण से पहले दुकानें बंद कर दिए जाने का कारण क्या है? क्या दुकानदार किसी विशेष जांच से बचना चाहते हैं या इसके पीछे कोई अन्य वजह है? इसका स्पष्ट जवाब संबंधित दुकानदार ही दे सकते हैं।
संभागीय टीम की जांच बनी चर्चा का विषय
संभागीय टीम द्वारा की जा रही जांच को लेकर नगर में विशेष चर्चा है। निरीक्षण के दौरान खाद-बीज विक्रेताओं के लाइसेंस, स्टॉक एवं दुकान में उपलब्ध प्रोडक्ट की स्थिति की जांच की जा रही है। प्रतिबंधित उत्पादों की उपलब्धता की जांच भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि ऐसे मामलों में नियमों का पालन सुनिश्चित करना कृषि विभाग की जिम्मेदारी है।
वहीं, स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी चर्चा में है कि जब संभागीय टीम निरीक्षण के लिए पहुंची, तब कई दुकानें बंद क्यों मिलीं। यदि दुकानें नियमित रूप से संचालित हो रही थीं तो जांच के समय उनके बंद पाए जाने से कई तरह की चर्चाओं को बल मिल रहा है।
स्थानीय कृषि विभाग की भूमिका पर भी सवाल
निरीक्षण के दौरान स्थानीय कृषि विभाग की टीम भी संभागीय अधिकारियों के साथ मौजूद रही। ऐसे में स्थानीय कृषि विभाग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि खाद-बीज दुकानों के नियमित निरीक्षण और नियमों के पालन की निगरानी स्थानीय स्तर पर किस प्रकार की जाती रही है। यदि किसी दुकान पर प्रतिबंधित उत्पाद अथवा नियमों के विपरीत कोई सामग्री मिलती है, तो उसकी जिम्मेदारी और कार्रवाई की प्रक्रिया क्या होगी, यह भी जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट हो सकेगा।
हालांकि, कृषि विस्तार अधिकारी निराली आर्या ने मीडिया से चर्चा में बताया कि संभागीय टीम द्वारा फिलहाल दुकानों का निरीक्षण एवं जांच की जा रही है। उन्होंने इसे सामान्य प्रक्रिया बताते हुए कहा कि यह कार्रवाई सभी दुकानों के लिए की जा रही है।
पुलिस लिखे वाहन को लेकर भी उठे सवाल
निरीक्षण के लिए संभागीय टीम जिस वाहन से पहुंची, उस वाहन पर “POLICE” लिखा होने की बात भी नगर में चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि यदि वाहन पर पुलिस लिखा है, लेकिन उसमें पुलिस विभाग का कोई अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं था, तो वाहन पर पुलिस लिखे जाने का आधार क्या है? क्या यह अधिकृत सरकारी वाहन है अथवा किसी अन्य विभाग द्वारा उपयोग किया जा रहा वाहन है? इस संबंध में संबंधित विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट किया जाना आवश्यक है, ताकि लोगों के बीच किसी प्रकार का भ्रम न रहे।







