शासन की व्यवस्था और जमीनी हकीकत के बीच फंसा किसान, घंटों कतार के बाद भी पर्याप्त खाद नहीं मिलने से बढ़ा आक्रोश;विधायक चौधरी सुजीत सिंह ने मौके पर पहुंचकर अधिकारियों से कराई व्यवस्था
चौरई (CTV) : खेतों में खड़ी फसल को खाद की जरूरत है और खाद के लिए अन्नदाता घंटों कतार में खड़ा है। गुरुवार को चौरई में खाद की किल्लत और वितरण व्यवस्था को लेकर किसानों का आक्रोश आखिरकार सड़क पर दिखाई दिया। सुबह से खाद लेने के लिए बड़ी संख्या में किसान, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, वितरण केंद्रों पर पहुंच गए। घंटों इंतजार और नंबर आने के बाद भी पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिलने से किसानों का सब्र जवाब दे गया और उन्होंने खाद विक्रय केंद्र के सामने मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया।

करीब डेढ़ घंटे तक चले चक्काजाम ने खाद वितरण व्यवस्था को लेकर किसानों की नाराजगी को सामने ला दिया। किसानों का कहना था कि वे सुबह से भूखे-प्यासे लाइन में खड़े हैं। शासन द्वारा निर्धारित वितरण प्रक्रिया के तहत खाद प्राप्त करने के लिए किसानों को कई औपचारिकताओं और लंबी कतार से गुजरना पड़ रहा है, लेकिन इतनी मशक्कत के बाद भी उनकी जरूरत के मुताबिक खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
नियम व्यवस्था के लिए, लेकिन जमीन पर किसान परेशान

शासन द्वारा खाद का वितरण किसानों के रकबे और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किए जाने की व्यवस्था बनाई गई है। किसानों का कहना है कि व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शी तरीके से खाद उपलब्ध कराना है, लेकिन जब उपलब्धता ही पर्याप्त नहीं हो तो यही व्यवस्था किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रही है।
किसानों के अनुसार कई जगह नंबर आने के बाद भी सीमित मात्रा में खाद का टोकन मिल रहा है। किसानों की मांग है कि जिस किसान के पास जितना कृषि रकबा है, उसे उसी अनुपात में खाद उपलब्ध कराई जाए। उनका कहना है कि यदि एक ओर शासन रकबे के हिसाब से खाद देने की व्यवस्था कर रहा है और दूसरी ओर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध नहीं है, तो इसका सीधा खामियाजा किसान को भुगतना पड़ रहा है।
किसानों ने खाद वितरण केंद्रों की संख्या बढ़ाने, केंद्रों के संचालन का समय बढ़ाने, अवकाश के दिनों में भी खाद वितरण करने तथा खाद की कालाबाजारी पर प्रभावी रोक लगाने की मांग उठाई।
प्रशासनिक व्यवस्था पर भी उठे सवाल

खाद की समस्या को लेकर किसानों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर यदि समय रहते पर्याप्त व्यवस्था और निगरानी की जाती तो उन्हें इतनी बड़ी संख्या में सड़क पर उतरने की जरूरत नहीं पड़ती। घंटों कतार में खड़े किसानों की परेशानी और लगातार बढ़ती भीड़ के बावजूद समस्या का समय रहते समाधान नहीं होने से स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे।
किसानों का आक्रोश केवल खाद की कमी को लेकर नहीं था, बल्कि इस बात को लेकर भी था कि उनकी समस्या सुनने और तत्काल समाधान करने के लिए उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
किसानों के बीच पहुंचे विधायक, अधिकारियों से कराई व्यवस्था

चक्काजाम की जानकारी मिलते ही क्षेत्रीय विधायक चौधरी सुजीत सिंह कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुंचे। विधायक ने पहले किसानों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनीं और खाद वितरण की वास्तविक स्थिति को समझा।
किसानों ने विधायक को अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि वे सुबह से खाद के लिए लाइन में खड़े हैं और बड़ी मुश्किल से नंबर आने के बाद भी पर्याप्त मात्रा में खाद नहीं मिल रही है।
विधायक चौधरी सुजीत सिंह ने मौके पर पहुंचे चौरई अनुविभागीय अधिकारी राजस्व प्रभात मिश्रा एवं कृषि विस्तार अधिकारी निराली आर्या से चर्चा कर किसानों की समस्याओं का तत्काल समाधान करने की बात रखी। चर्चा के दौरान 1 से 5 एकड़ तक के रकबे वाले किसानों को प्रति एकड़ 2 बोरी खाद उपलब्ध कराने सहित व्यवस्था में सुधार को लेकर सहमति बनी।
“खाद समय पर नहीं मिली तो फसल पर पड़ेगा असर”
विधायक चौधरी सुजीत सिंह ने कहा कि खाद की कमी से किसान लगातार परेशान हो रहे हैं। किसान अपनी फसल बचाने के लिए खाद की मांग कर रहा है। यदि उसे समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं होती है तो इसका असर फसल के उत्पादन पर पड़ सकता है। प्रशासन को किसानों की परेशानी को गंभीरता से लेते हुए पर्याप्त खाद की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
वहीं ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष तीरथ सिंह ठाकुर ने कहा कि यदि प्रशासन किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं कराता है तो कांग्रेस पार्टी किसानों के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन करेगी।
चौरई की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कागज पर बनाई गई वितरण व्यवस्था और खेत में खड़े किसान की वास्तविक जरूरत के बीच आखिर इतना बड़ा अंतर क्यों है? अन्नदाता को अपने खेत के लिए खाद लेने सड़क पर उतरना पड़े, इससे बड़ी चिंता कृषि व्यवस्था के लिए और क्या हो सकती है।








