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हम बच्चों को संस्कार देने की बजाय रील बनाने में समय बिता रहे हैं – दीदी सेवानंद जी

मारकाहांडी में भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन

चौरई।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में संपूर्ण भारत में हिंदू सम्मेलन कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में चौरई विकासखंड के ग्राम मारकाहांडी में भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया।

सम्मेलन में आसपास के 8 ग्रामों से ग्रामीण कलश यात्रा लेकर बड़ी संख्या में पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, यज्ञ एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। ग्रामीणों की उपस्थिति में पूरा आयोजन अत्यंत भव्य एवं अनुशासित वातावरण में संपन्न हुआ।

इस अवसर पर उपस्थित संत वासुदेवानंद जी, सुरेंद्र रंगढाले जी एवं दीदी सेवानंद जी ने अपने प्रेरक वक्तव्यों के माध्यम से हिंदू सनातन संस्कृति, धर्म एवं वर्तमान सामाजिक परिवेश पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने राष्ट्रहित, समाजहित एवं व्यक्तित्व निर्माण के लिए आत्मचिंतन की आवश्यकता पर बल दिया।

दीदी सेवानंद जी ने अपने संबोधन में कहा कि आज समाज को कुटुंब और परिवार की अत्यंत आवश्यकता है। पहले संयुक्त परिवार की परंपरा थी, लेकिन आज समाज एकल परिवार की ओर बढ़ रहा है, जिसके दुष्परिणाम स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज हम बच्चों को संस्कार देने की बजाय रील बनाने और देखने में समय बिता रहे हैं। इसका परिणाम यह है कि धर्म परिवर्तन, गलत निर्णय, और सामाजिक विघटन जैसे उदाहरण सामने आ रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि हम अन्य संस्कृतियों की नकल में अपनी जड़ों से दूर होते जा रहे हैं। इतिहास को दोहरा तो रहे हैं, लेकिन उससे सीख नहीं ले रहे। आज हमारा कुटुंब, जाति, संस्कृति और पर्यावरण बिखरता जा रहा है। समाज और राष्ट्र के अस्तित्व को बचाने के लिए हमें अपने कर्तव्यों पर चिंतन करना होगा, तभी व्यक्ति निर्माण, समाज विकास और सशक्त राष्ट्र का सपना साकार हो सकेगा।

वहीं सुरेंद्र रंगढाले जी ने भी अपने वक्तव्य में समाज और राष्ट्रहित में व्यक्ति को तीन स्तरों पर चिंतन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चिंतन से ही उत्कृष्ट भारत और सशक्त समाज का निर्माण संभव है।हिंदू सम्मेलन कार्यक्रम में ग्रामीण अंचलों से आए राष्ट्रीय स्वयंसेवक, मातृशक्ति एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।